यूजीसी के 5 मार्च के आरक्षण रोस्टर सर्कुलर के विरुद्ध क्रमिक अनशन के पांचवें दिन छात्रावासों तथा डेलीगेसी में जागरूकता अभियान का निर्णय लिया गया


आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ भवन के सामने अकादमिक जस्टिस संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले छात्रों ने यूजीसी की विभागवार और विषयवार रोस्टर आरक्षण प्रणाली के विरुद्ध पाँचवे दिन क्रमिक अनशन किया । इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष अवनीश यादव ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण को समाप्त करना चाहती है और जो काम  सीधे तौर पर नहीं कर पाती वह कोर्ट के माध्यम से कर रही है। हम सब ने  अपनी एकता का परिचय देते हुए हाल ही में एससी एसटी एक्ट और त्रिस्तरीय आरक्षण प्रणाली को खत्म करने की साजिश को बेनकाब किया है और इस साजिश के विरुद्ध हमारा संघर्ष जारी है।इसी क्रम में हाल ही में विगत 5 मार्च 2018 को यूजीसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का बहाना बनाते हुए एक शासनादेश के द्वारा आरक्षण लागू करने का एक नया ही सिद्धांत दिया है । अभी तक की चली आ रही है आरक्षण प्रणाली के  अनुसार कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा  पिछड़ा वर्ग को  विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय को इकाई मानकर नियुक्ति में आरक्षण दिया जाता था जिसे यूजीसी ने 5 मार्च 2018 के शासनादेश के माध्यम से परिवर्तित कर विभाग तथा विषय को इकाई मानकर 13 पॉइंट की प्रणाली द्वारा नियुक्ति नियुक्तियों में आरक्षण देने का फरमान जारी किया है। इस नई प्रणाली से इन सभी संवर्गों का उच्च शिक्षा में भारत सरकार द्वारा दिए गए आरक्षण प्रतिशत (क्रमशः15%, 7.5% तथा 27.5%) से बहुत कम आरक्षण बचेगा। विभागवार/विषयवार आरक्षण का मतलब है उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की समाप्ति।इसका मतलब है किसी भी प्रत्येक कालेज/विश्वविद्यालय के किसी भी विभाग/विषय में जब 4 पद होंगे तब एक पद ओबीसी को मिलेगा, जब 7 पद होंगे तब एक SC, को और 14 पद होंगे तब एक पद ST को मिल सकेगा। ऐसा इसलिए कि 13 या उससे कम पदों पर 13 बिंदुंओ वाला रोस्टर लागू किया जाता है। किसी भी कालेज और विश्वविद्यालय के किसी भी विभाग/विषय में इतने पद होते ही नहीं हैं।
स्कॉलर्स फार रिप्रजेंटेशन के समन्वयक  रंजीत कुमार सरोज ने  अवनीश की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि आरक्षण को कमजोर बनाने की चाल केवल शैक्षणिक स्थानों संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहेगी क्योंकि इसके बाद कोर्ट के माध्यम से अन्य सभी नौकरियों में यही प्रणाली लागू की जाएगी। उदाहरण के लिए एक विभाग में अगर अलग-अलग तरह के अनुभाग है तो उस संपूर्ण विभाग को इकाई न मानकर बल्कि अलग-अलग अनुभागों को इकाई मानकर आरक्षण दिया जाएगा जिससे सभी प्रकार के सरकारी नौकरियों में आरक्षण समाप्त/ निष्प्रभावी हो जाएगा। "अतः अगर आज जातिवादी मानसिकता के लोगों के आरक्षण को खत्म करने के मंसूबों को असफल नहीं बनाया गया तो हम पुरानी ब्राह्मणवादी व्यवस्था में पहुंच जाएंगे जहां हमें शूद्र  कहकर अपमानित किया जाता था और मनोबल तोड़ दिया जाता था। इसके क्या परिणाम होंगे आप सभी सम्मानित बुद्धिजीवी साथी जानते हैं।"
अतः उपरोक्त के आलोक में अकादमिक जस्टिस संयुक्त संघर्ष मोर्चा समिति ने मांग की कि  UGC के 5 मार्च 2018 को जारी किए गए सर्कुलर को तुरंत निरस्त करें और सर्वप्रथम बैकलॉग की सीटों को विज्ञापित किया जाए और उन पर नियुक्तियां की जाएं  तथा भारत के सभी विश्वविद्यालयों में 5 मार्च के UGC के सर्कुलर के अनुसार  भर्तियों पर तत्काल रोक लगा दी जाए।
आज के क्रमिक अनशन में यह भी निर्णय लिया गया कि आंदोलन में तेजी लाने के लिए छात्रावासों तथा डेलीगेसी में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा ।

आज के क्रमिक अनशन में भाग लेने वालों में राहुल पटेल  शिव बली अजय कुमार दिनेश हेमंत गोविंद अनुज देवेंद्र नाथ गिरी चंद्रभूषण भारती पंकज कुमार चौधरी अजय कुमार अहिरवार जितेंद्र कुमार परमानंद पटेल प्रदीप रावत रजनीश कुमार लाल बाबू यादव अनिरुद्ध यादव अभिषेक यादव नवनीत जॉली यादव विकास कुमार आशीष प्रताप यादव अविनाश विद्यार्थी अभिषेक हिमांशु आदित्य अरविंद सरोज प्रहलाद सरोज राघवेंद्र यादव विजय कांत यादव सोनिका गुप्ता आदि लोग उपस्थित रहे।

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