" यूजीसी के 5 मार्च के आरक्षण रोस्टर सर्कुलर के विरुद्ध क्रमिक अनशन का दूसरा दिन "




आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ भवन के सामने अकादमिक जस्टिस संयुक्त मोर्चा समिति के बैनर तले शोध छात्रों ने यूजीसी के विभागवार और विषयवार रोस्टर आरक्षण प्रणाली के विरुद्ध क्रमिक अनशन किया। आज क्रमिक अनशन का दूसरा दिन था ।यूजीसी रेगुलेशन 2006 के अनुसार नियुक्तियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति,  पिछड़ा वर्ग, तथा विकलांगों को अभी तक विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय को इकाई मानकर नियुक्ति में आरक्षण दिया जाता था जिसे यूजीसी ने 5 मार्च को सर्कुलर के माध्यम से परिवर्तित कर विभाग तथा विषय को इकाई मानकर नियुक्ति करने का फरमान जारी किया है। इस नई प्रणाली से इन सभी संवर्गों का उच्च शिक्षा में भारत सरकार द्वारा दिए गए आरक्षित प्रतिशत से बहुत कम हो जाएगा  क्योंकि नई व्यवस्था के अंतर्गत विभागों में रिक्तियों की संख्या बहुत कम चार या पांच ही होती है।कम से कम 4 पद होने पर ओबीसी, 7 पद होने पर एस सी ,15 पद होने पर एस टी और 33 पद होने पर विकलांगों का पद आरक्षित होगा और साधारणत: विभागों में इतनी रिक्तियां होती ही नहीं है ।अतः इस व्यवस्था में क्रमश: विकलांग, आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के अभ्यर्थियों को सबसे अधिक नुकसान होगा। ज्ञातव्य हो कि इन वर्गों के बैकलॉग पद न भरने से वर्ष 2016 -17 की यूजीसी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार इन वर्गों का शैक्षणिक पदों पर प्रतिनिधित्व मात्र 19% है जबकि यह 49.5 % होना  चाहिए।
विश्वविद्यालय में शोधरत छात्र रंजीत कुमार सरोज ने स्टूडेंट फॉर रिप्रजेंटेशन की तरफ से अपनी मांग करते हुए कहा कि सर्वप्रथम यूजीसी इस सर्कुलर को तुरंत निरस्त करें  इसके साथ ही साथ भारत में शैक्षणिक संस्थानों में हो रही असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्तियों को तुरंत रोक दिया जाए और विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय को यूनिट मानकर आरक्षण लागू किया जाए ।उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में सबसे पहले बैकलॉग की सीटों को भरा जाए उसके बाद ही किसी सामान्य वैकेंसी को विज्ञापित करें ।इसके लिए केंद्र सरकार एक बिल संसद में पेश कर आरक्षण पर एक अधिनियम  बनाए उसके बाद ही इस बीमारी से बचा जा सकता है ।अधिनियम बनाने में देरी हो सकती है तब तक के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा UGC एक अध्यादेश जारी करें जिसमें कहा जाए कि शैक्षणिक संस्थानों को ही यूनिट मानकर आरक्षण  दिया जाएगा । मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास के  प्राचार्य  डॉ. विक्रम हरिजन ने कहा कि विभागवार/विषयवार आरक्षण का मतलब है उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की समाप्ति।इसका मतलब है किसी भी  कालेज/विश्वविद्यालय के किसी भी विभाग/विषय में जब 4 पद होंगे तब एक पद ओबीसी को मिलेगा, जब 7 पद होंगे तब एक SC, को और 14 पद होंगे तब एक पद ST को मिल सकेगा। ऐसा इसलिए कि 13 या उससे कम पदों पर 13 बिंदुंओ वाला रोस्टर लागू किया जाता है। किसी भी कालेज और विश्वविद्यालय के किसी भी विभाग/विषय में इतने पद नहीं होते हैं। ऐसा करने से SC, ST, OBC को क्रमशः 15%, 7.5%, 27% मिलने वाला आरक्षण पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाता है।इस बात पर जोर दिया जाये कि फार्मूला कोई भी हो हमें 15%, 7.5%, 27% प्रतिनिधित्व चाहिये। आज के   इस क्रमिक अनशन में रंजीत कुमार सरोज अवनीश कुमार यादव विजय कुमार सरोज अनिरुद्ध कुमार सिंह अजय अहिरवार अविनाश विद्यार्थीचंद्र भूषण भारती अमित कुमार सरोज  अरविंद  सरोज  उदय प्रताप यादव और अन्य छात्र मौजूद रहे ।

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